Thursday, August 14, 2008

...और मुझे महोब्बत न करो.....

इक इल्तज़ा है तुमसे
कि मेरे दोस्त बन जाओ
और मुझसे मुहब्बत न करो.....
यह तमन्ना है कि मेरी ज़िन्दगी में आओ
और मुझसे मुहब्बत न करो............॥

सिवा तुम्हारे कुछ सोचूँ नहीं मैं
सोचता हूँ, बता दूं
मगर रूबरू जब तुम हो तो कुछ बोलूं नहीं मैं ...
काश ऐसा हो कि
मैं तुम, तुम मैं बन जाओ
और मुझसे मुहब्बत न करो.....॥

अक्सर देखा है
मुहब्बत को नाकाम होते हुए
साथ जीने के वादे किए
फिर तनहा रोते हुए.......

जो हमेशा साथ निभाए..वो तो बस दोस्ती है
जो कभी ना रूलाए..वो तो बस दोस्ती है........
यूँ ही देखा है बचपन कि दोस्ती को बूढा होते हूए
ना किए कभी वादे..पर हर वादे को पूरा होते हूए...॥

यह तमन्ना है के मेरी ज़िन्दगी में आओ
और मुझसे मुहब्बत न करो.....
ये इल्तज़ा है के मेरे दोस्त बन जाओ
और मुझसे मुहब्बत न करो...........॥

यु ही ताउम्र मेरा साथ निभाओ
और मुझसे मुहब्बत न करो...........
और मुझसे मुहब्बत न करो...........॥
-Anon

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