मिलना था इत्तेफाक, बिछड़ना नसीब था
वह उतनी दूर हो गया, जितना करीब था
मैं उसको देखने के लिए तरसती ही रह गई
जिस शख्स की हथेली पर मेरा नसीब था
दफना दिया गया मुझको चांदी की कबर में
मैं जिसको चाहती थी वह लड़का अमीर था
बस्ती के सारे लोग ही आतिशपरस्त थे
घर मेरा जल रहा था, समंदर करीब था
-Anon
Monday, August 18, 2008
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1 comment:
it is by anjum rahabar
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